तीसरा वर्ग मनोवैज्ञानिक कमी हैः जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्रा

08 Dec, 2018

 दैनिक जागरण की 75वीं वर्षगांठ पर जागरण फोरम में जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्रा और मुकुल रोहतगी ने नागरिक अधिकार और न्यायपालिका विषय पर अपने विचार रखे। फोरम के इस चौथे सत्र का संचालन संजय जैन ने किया। जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्रा ने कहा कोर्ट का काम बैलेंस करने का होता है। उन्होंने धारा 377 पर कहा कि ये अधिकार हो सकता है। हालांकि मेरी व्यक्तिगत राय ये है कि तीसरा वर्ग मनोवैज्ञानिक कमी है। इसमें चिकित्सा की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब समाज का बड़ा वर्ग किसी तरह की बंदिश में था तो कोर्ट ने सही फैसला सुनाया। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हर हालत में कायम रहनी चाहिए। जस्टिस ज्ञानसुधा मिश्रा ने कहा कि संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर कोर्ट आंख नहीं मूद सकता। धर्म के अधिकार और संवैधानिक अधिकारों में किसी तरह का संघर्ष होता है तो कोर्ट दखलअंदाजी करेगा। मेरी व्यक्तिगत राय है कि सबरीमाला में महिलाओं के अधिकारों पर कोर्ट का फैसला सही है।

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