Shani Jayanti 2021: 148 साल बाद बना ऐसा योग, शनि जयंती और सूर्यग्रहण आज दोनों एक साथ

Shani Jayanti 2021: 148 साल बाद बना ऐसा योग, शनि जयंती और सूर्यग्रहण आज दोनों एक साथ

10 Jun, 2021

Shani Jayanti 2021: 

हिन्दी पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि शनि जयंती मनाई जाती है। शनि जयंती को शनि अमावस्या के नाम से भी जाने जाते हैं। इस साल (Shani Jayanti date 2021) शनि जयंती 10 जून को मनाई जाएगी। इस दिन दिन शनि देव की पूरे विधि विधान के साथ पूजा करने से शनि की कृपा होती है, भक्त के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

 

मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनिदेव का जन्म हुआ था। शनिदेव को न्याय का देवता भी कहा जाता है। शनि दोष की शांति के उपाय लिए ज्येष्ठ अमावस्या का दिन बेहद शुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन लोग शनि देव की विधिपूर्वक पूजा करते हैं। शनि महाराज की कृपा से उपासक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

 

148 साल बाद बन रहा ऐसा योग

आपको बता दें कि 148 साल बाद एक संयोग बन रहा है कि जिस दिन सूर्य ग्रहण है उसी दिन शनि जयंती भी मनाया जाएगा। इस दिन की खास बात तो यह है कि 10 जून को पिता को ग्रहण लगेगा और पुत्र का जन्म दिन होगा। बता दें कि सूर्य पिता हैं और शनिदेव पुत्र हैं। लेकिन शास्त्रों के अनुसार तो दोनों ही पिता पुत्र के बीच में दूरियां बनी रहती हैं। सूर्य छाया पुत्र शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ मास की अमावस्या के दिन हुआ था इसलिए हर साल इस दिन शनि जयंती मनाई जाती है। इस बार शनि जयंती 10 जून 2021 को मनाया जाएगा। शनि जयंती, शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए बेहद ही महत्व रखता है। इस दिन शनि देव का विधि-पूर्वक पूजन करने से जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है। इस बार शनि जयंती बहुत ही खास माना जा रहा है क्योंकि इस दिन सूर्य ग्रहण भी लगने वाला है।

 

हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में तो नहीं दिखाई देगा और ना ही इस सूर्य ग्रहण का सूतक काल माना जाएगा और ना ही किसी भी राशि पर इसका प्रभाव पड़ने वाला है। सूर्य ग्रहण भारतीय समय के मुताबिक दोपहर के 1.42 बजे ग्रहण शुरू होगा जो शाम को 6.40 मिनट पर खत्म होगा। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक इस समय अपने पिता सूर्य की चाल की वजह से शनि अपनी स्वयं की मकर राशि में ही वक्री हैं और शनि जयंती पर ही सूर्य ग्रहण लगने वाला है।


बता दें कि ऐसा संयोग करीब 148 साल पहले 26 मई सन् 1873 में बना था जब शनि मकर राशि में थे और उस समय सूर्य ग्रहण और शनि जयंती एक साथ मनाई गई थी। इस बार भी लगने वाला सूर्य ग्रहण मृगशिरा नक्षत्र के वृषभ राशि में लगने वाला है। मंगल ग्रह मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी है और इस समय मंगल मकर राशि में वक्री शनि की पूर्ण दृष्टि मीन राशि और कर्क राशि में मौजूद मंगल पर पड़ रही है। बता दें कि भारत में इस सूर्यग्रहण का कोई प्रभाव नहीं होगा और ना ही किसी राशि के जातक जातक पर किसी भी तरह का कोई असर देखने को मिलेगा। 

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